January 20, 2022

क्यों की जाती है गोवर्धन पूजा ? क्या है गोवर्धन पूजा का धार्मिक महत्व

GOVARDHAN pooja

दीपावली (Deepawali) के अगले दिन गोवेर्धन (Govadhan) की पूजा की जाती है. कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपाद तिथि यानी कि दीपावली के एक दिन बाद गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है। इस साल ये त्योहार 5 नवंबर 2021 यानी शुक्रवार को मनाया जा रहा है. इस दिन गोबर का गोबर्धन बनाया जाता है इसका खास महत्व होता है।

आज के दिन सभी गौमाता का पूजन करते हैं । ऐसी मान्यता है कि गाय देवी लक्ष्मी का स्वरूप है। भगवान श्रीकृष्ण ने आज ही के दिन इंद्र का अपमान कर गिरिराज पूजन किया था। भारतीय परंपरा में गाय की पूजा का बहुत ही महत्व है।

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गाय को मां का दर्जा दिया गया है. पौराणिक मान्यता है कि गाय में सभी देवों का वास होता है । पंचग्व्य, चरणामृत सहित गाय का दूध गोबर सभी कुछ पवित्र माना जाता है। गाय के घी को औषधीय गुणों वाला माना जाता है ।

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हिंदू धर्म में गाय (Cow) का महत्व

हिंदू धर्म (Hindu Dharma) में गाय को माता कहा गया है । गोवर्धन के दिन मंदिरों में श्रद्धालु भगवान श्री कृष्ण की पूजा करते हैं और गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने से विशेष फल मिल जाता है । वहीं इस दिन लोग घरों में गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर जल, मौली, रोली, चावल, फूल, दही और दीप जलाकर पूजा अर्चना किया करते हैं । कहा जाता है इस दिन गायों की पूजा भी की जाती है और फिर गाय को मिठाई खिलाकर उनकी आरती उतारकर प्रदक्षिणा की जाती है ।

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गोवेर्धन पूजा में इन बातो का रखे ध्यान

गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का आयोजन बंद कमरे में नहीं करना चाहिए। गायों की पूजा करते हुए ईष्टदेव या भगवान कृष्ण की पूजा करना न भूलें. गोवर्धन के दिन चंद्रमा का दर्शन न करें।

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