January 20, 2022

भाई दूज – क्यों मनाया जाता है भाई दूज, भाई दूज का महत्व

भाई दूज - क्यों मनाया जाता है भाई दूज, भाई दूज का महत्व

हमारे देश में भाई दूज के दिन बहनें अपने भाई को प्रेमपूर्वक तिलक कराती है। उन्हें प्यार से भोजन करवाया जाता है। इस दिन सभी बहनें भगवान से अपने भाइयों की लम्बी आयु की कामना करती है। यह मान्यता प्रचलित है की यमुना जी ने अपने भाई यमराज से ये वचन लिया था , की भाई दूज मनाने से यमराज के डर से मुक्ति मिलती है और भाई-बहन में प्रेम के साथ ही सौभाग्य में भी वृद्धि होती है। बदले में भाई भी अपनी बहनों को बहुत सारा उपहार देते है। भाई दूज का त्यौहार भी रक्षाबंधन के तरह भाई बहन के रिश्ते को और मज़बूत बनता है।

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भाई दूज को भारत के अलग-अलग जगहों पर अलग नाम से जाना जाता है। संस्कृत में इसे भागिनी हस्ता भोजना कहते हैं तो वही कर्नाटक में इसे सौदरा बिदिगे के नाम से जानते हैं। बंगाल में भाई दूज को भाई फोटा, नेपाल में भाई टीका और महाराष्ट्र में भाव बीज के रूप में मनाते हैं।

इस दिन सभी विवाहित बहनें अपने भाइयों को घर आने का न्योता देती हैं। रक्षाबंधन के तरह ही भाई दूज के दिन भाई अपने बहन का आदर सत्कार करता है और बहन भी अपने भाई की लम्बी उम्र की प्रार्थना करती है।

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भाई दूज पर्व को लेकर कुछ कथाएं भी प्रचलित है। कहा जाता है की इस दिन यमुना ने अपने भाई यमराज को अपने घर पर पूरे आदर और सत्कार के साथ भोजन करवाया था। उस दिन सब ने मिलकर एक महान उत्सव मनाया जो की यम लोक के लिए खुशियों भरा था। इसलिए ये दिन तीनो लोको में यम द्वितीया के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

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जिस दिन यमुना ने यम को अपने घर बुलाकर भोजन करवाया था उस दिन जो भी मनुष्य अपनी बहनों के हाथों से अच्छा भोजन प्राप्त करते हैं उसे मान्यताओं के अनुसार धन और भोजन की कभी भी कमी नहीं होती है।

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