January 20, 2022

क्या आप जानते है किस कारण हुआ मां गंगा का धरती अवतरण

सनातन धर्म में मां गंगा (Maa Ganga) का बहुत महत्‍व है. हर तीज-त्‍यौहार पर गंगा स्‍नान करने और पूजन-पाठ, शुभ कार्य में गंगाजल का उपयोग करने की पंरपरा सदियों से चली आ रही है. पापों को धोने वाली जीवनदायिनी मां गंगा का ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन धरती पर अवतरण हुआ था।

पौराणिक कथाओ में ऐसा वर्णन किया हुआ है कि सगर नाम के एक प्रतापी राजा थे. एक बार उन्होंने अश्वमेध यज्ञ किया. अश्वमेध यज्ञ के घोड़े को देवताओं के राजा इंद्र ने चुरा कर कपिलमुनी के आश्रम में बांध दिया. फिर उस घोड़े की तलाश में राजा सगर के 60 हजार पुत्र निकले. उन्होंने कपिलमुनी के आश्रम में जैसे ही घोड़े को देखा, वैसे ही बिना सोचे-समझे आक्रमण कर दिया. इससे तपस्‍या में लीन कपिलमुनी की आंखें खुल गईं और क्रोध से आग बरसाती उनकी आंखों की अग्निज्वाला से राजा के सभी पुत्र जलकर भस्म हो गए.

श्री रामचंद्र के पूर्वज राजा भगीरथ ने अपने पूवर्जो के पापो से मुक्ति पाने के लिए गंगोत्री धाम के एक पवित्र शिलाखंड पत्थर पर बैठकर शंकर भगवान और माँ गंगा की कठोर तपस्या की थी। राजा भगीरथ की तपस्या से प्रसन होकर माँ गंगा दायनी ने जीवन की इस धारा को पृथ्वी पर पहली बार स्पर्श किया था। और इसी स्थान पर भगवान शंकर ने माँ गंगा के इस प्रभाव को कम करने के लिए उन्हें अपनी घुंघराली जटाओ में लपेट लिया था। ताकि पृत्वी पर मनुस्य जीवन जीवित रहे।

गंगोत्री धाम के कपाट प्रत्येक वर्ष मई माह में ‘अक्षय-तृतीय’ के शुभ अवसर पर खोले जाते है और दिवाली से अगले दिन भाईदोज पर एक भव्य समापन समरोह के बाद मंदिर के कपाट को 6 माह के लिए बंद कर दिया जाता है ।

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