January 20, 2022

हर्षिल: उत्तराखंड का अपना स्विट्ज़रलैंड

harshil

हर्षिल का इतिहास

हर्षिल की खोज ईस्ट इंडिया कंपनी में काम करनेवाले अंग्रेज़ फ़ेड्रिक विल्सन ने की थी. यह जगह उन्हें इतनी पसंद आई कि वो अपनी नौकरी छोड़कर इस जगह पर रहने लगे. बाद में उन्होंने एक पहाड़ी लड़की से शादी कर ली और पूरी तरह से हर्षिल के हो गए.

हर्षिल में सेब का पहला पेड़ फ़ेड्रिक विल्सन ने इंग्लैंड लाकर लगाया था तब से वहां पर सेब की खेती और व्यापार होने लगा. विल्सन नाम की सेब की एक प्रजाति आज भी हर्षिल में बहुत प्रसिद्ध है. विल्सन ने ही हर्षिल को स्विट्ज़रलैंड की उपाधि दी थी.

 

बॉलिवुड की सुपर-डूपर हिट फ़िल्म राम तेरी गंगा मैली की शूटिंग भी यहीं हुई थी.

हर्षिल की ख़ासियत

हिमाच्छादित पर्वत, निर्झर झरने, दूर तक फैले देवदार और चिनार के घने जंगल, उसके नीचे ज़ोर-शोर से बहती भगीरथी की अविरल धारा और सांप-सी बलखाती हुई बेहतरीन सड़कें, जो आपको हर्षिल के उन तमाम जगहों पर ले जाएंगी जहां आप जाना चाहते हैं. ‘हर्षिल मेरे अब तक के सफ़र का सबसे पसंदीदा पड़ाव रहा है, जो एक नशे की तरह मुझमें समाया है, जिससे मैं कभी उबरना नहीं चाहूंगी.’ हर्षिल में आपको प्राकृतिक रंगों की वह छटा देखने को मिलेगी, जिन रंगों की कल्पना मनुष्य ने शायद ही की होगी. वहां की विस्तृत घाटियां ऐसी लगती हैं, मानो ईश्वर ने ख़ुद अपने हाथों से कोई पेंटिंग बनाई है और उसमें वह सभी रंग भर दिए हैं, जो कि आपकी आंखों में समा ही नहीं पाते.

 

यहां के सेब भी मशहूर हैं और अगर जाएं तो ज़रूर खाएं. आपको एक अलग स्वाद मिलेगा. रास्ते के लिए भी लेकर रखें. मोलभाव भी करें. छोटे-छोटे सेब भी बड़े स्वाद के होते हैं.

 

हर्षिल कैसे और कब जाएं?

ऋषिकेश से उत्तरकाशी और फिर वहां से हर्षिल और गंगोत्री की तरफ़ बढ़ा जा सकता है. आप वहां पर अप्रैल-जून और सितंबर से नवंबर तक जा सकते हैं. आप अपने शुरुआती बिंदु से प्राइवेट टैक्सी कर सकते हैं, अपनी कार भी ले जा सकते हैं. उत्तरकाशी से लोकल गाड़ियां भी जाती हैं.

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