January 20, 2022

शिवजी ने सतरूपा को ब्रह्माजी की कुदृष्टि से बचाने के लिए काटा पाँचवा सिर

शिवजी ने सतरूपा को ब्रह्माजी की कुदृष्टि से बचाने के लिए काटा पाँचवा सिर

हिंदू पौराणिक कथाओं में संपूर्ण सृष्टि का रचनाकार ब्रह्मा को कहा जाता है, जिन्होंने अपने ही शरीर से देवताओं, राक्षसों, पुरुषों और इस धरती पर मौजूद सारे प्राणियों को बनाया है। ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मा के चार सिर हैं, जिन्हें चारों वेदों के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है। शुरू में उनके पांच सिर थे, जिनमें से एक को शिव जी ने क्रोध में आकर काट दिया था। एक सिद्धांत यह मानता है कि इंसान अकसर उन्हीं देवी-देवताओं की पूजा करता है, जो आम तौर पर एक योद्धा होते हैं।

भारत में सभी देवी-देवताओं के मंदिर तो सहज ही मिल जाएंगे, पर ब्रह्मा जी का मंदिर विरले ही आपको देखने को मिलेगा। ब्रह्माजी का सिर्फ एक मात्र मंदिर आपको ( पुष्कर )  राजस्थान में ही मिलेगा।

 

शिवजी ने सतरूपा को ब्रह्माजी की कुदृष्टि से बचाने के लिए काटा पाँचवा सिर

शास्त्र अनुसार, कहा जाता है कि ब्रह्मा ने सृजन के दौरान ही एक चौंकाने और बेहद ही सुंदर महिला को बनाया था। हालांकि, उनकी यह रचना इतनी सुंदर थी कि वे उसकी सुंदरता से मुग्ध हो गये और ब्र्ह्मा उसे अपनाने की कोशिश करने लगे। ब्रह्मा जी अपने द्वारा उत्पन्न सतरूपा के प्रति आकृष्ट हो गए । सतरूपा ने ब्रह्मा की दृष्टि से बचने की हर कोशिश की किंतु असफल रहीं। कहा तो ये भी जाता है कि सतरूपा में हजारों जानवरों में बदल जाने की शक्ति थी और उन्होंने ब्रह्मा जी से बचने के लिए ऐसा किया भी, लेकिन ब्रह्मा जी ने जानवर रूप में भी उन्हें परेशान करना नहीं छोड़ा।

अध्यात्म के लिए विश्वविख्यात ऋषिकेश में आकर अगर यह नहीं देखा तो क्या देखा

 

इसके अलावा ब्रह्मा जी की नज़र से बचने के लिए सतरूपा ऊपर की ओर देखने लगीं, तो ब्रह्मा जी अपना एक सिर ऊपर की ओर विकसित कर दिया जिससे सतरूपा की हर कोशिश नाकाम हो गई। भगवान शिव ब्रह्मा जी की इस हरकत को देख रहे थे। शिव की दृष्टि में सतरूपा ब्रह्मा की पुत्री सदृश थीं, इसीलिए उन्हें यह घोर पाप लगा। इससे क्रुद्ध होकर शिव जी ने ब्रह्मा का सिर काट डाला ताकि सतरूपा को ब्रह्मा जी की कुदृष्टि से बचाया जा सके।

 

शास्त्र अनुसार, भगवान शिव ने इसके अतिरिक्त भी ब्रह्मा जी को शाप के रूप में दंड दिया। इस श्राप के अनुसार, त्रिदेवों में शामिल ब्रह्मा जी की पूजा-उपासना नहीं होगी। इसीलिए आप देखते हैं कि आज भी शिव एवं विष्णु पूजा का व्यापक चलन है ,जबकि ब्रह्मा जी को उपेक्षित रखा जाता है।

 

अगर आपके फ़ोन में है ये ऐप तो अभी कर दें डिलीट, चोरी हो सकता है आपका डाटा

 

धर्म के बुनियादी सिद्धांतो के अनुसार, लोलुपता, वासना , लालच आदि की इच्छाओं को मोक्ष प्राप्ती का अवरोधक तत्व माना गया है। इस तरह का काम करके ब्रह्मा जी ने पूरे मानव जाति के समक्ष एक अनैतिक उदाहरण पेश किया था, जिसके कारण उन्हें ये श्राप मिला था।

Leave a Reply

Your email address will not be published.