January 20, 2022

जब भगवान श्रीकृष्ण ने गंगू रमोला से मांगी रहने के लिए कुछ पग जमीन

उत्तराखंड में भगवान नागराजा का पवित्र स्थल सेम मुखेम को माना जाता है। यह स्थान टिहरी जनपद के रमोली नामक पट्टी में नेर थुनैर के जंगलों के बीच स्थित है।

इस मंदिर का सुंदर द्वार 14 फुट चौड़ा तथा 27 फुट ऊँचा है। इसमें नागराज फन फैलाये है और भगवान कृष्ण नागराज के फन के ऊपर बंसी की धुन में लीन है। मंदिर में प्रवेश के बाद नागराजा के दर्शन होते है। मंदिर के गर्भगृह में नागराजा की स्वयं भू-शिला है। ये शिला द्वापर युग की बताई जाती है। मंदिर के दाई तरफ गंगू रमोला के परिवार की मूर्तियाँ स्थापित की गई है। सेम नागराजा की पूजा करने से पहले गंगू रमोला की पूजा की जाती है। हर 3 साल में सेम मुखेम नागराज मंदिर में एक भव्य मेले का आयोजन होता है जो कि इस  बार नवंबर माह की  25 , 26 को  है।

 माना जाता है कि द्वारिका के डूबने के पश्चात भगवान श्रीकृष्ण सेम मुखेम आए यहां की सुंदरता और मनमोहक वादियों में भगवान श्रीकृष्ण का मन मोह लिया और उन्होंने ठान लिया कि वो अपना जीवन यापन इसी स्थान पर करेंगे । परन्तु उस समय टिहरी के इस सुन्दर स्थान रमोली पर राजा गंगू रमोला का शासन था। उस समय गंगू रमोला की ख्याति एक क्रूर शासक के रूप में फैली थी।
      कथाओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण गंगू रमोला के घर में एक ब्राह्मण वेश में जाते हैं। और गंगू रमोला से वहां बसने के लिए कुछ पग जमीन मांगते है, भगवान के पग के नीचे पूरी रमोलाी पट्टी आ जाती है तब गंगू रमोला जगह देने से मना कर देते है और उनका तिरिष्कार करके वहां से भेज देते है। भगवान के चले जाने के बाद कुछ दिन बाद गंगू रमोला जिसकी बहुत सारी भेंस थी एक एक कर सारी भेंस मरने लगते है, गंगू रमोला परेशान हो जाते है और अपने किए का उसको पछतावा होने लगता है,
फिर भगवान कृष्ण गंगू रमोला के स्वप्न में आते है और अपने दिव्य दर्शन देते है। अगले ही दिन गंगू रमोला भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में गिर जाते है और उनको वहां रहने के लिए जगह दे देते है। कहा जाता है कि गंगू रमोला निसंतान थे परन्तु भगवान श्रीकृष्ण के आशिर्वाद से उनको निन्यानवे साल की उम्र में संतान का सुख प्राप्त होता है।

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