January 20, 2022

जनहित के लिए सब कर्म करने से कल्याण निश्चित है, इस लोक में भी और परलोक में भी

जनहित के लिए सब कर्म करने से कल्याण निश्चित है, इस लोक में भी और परलोक में भी

मात्र मनुष्य अपना कल्याण कर सकते हैं और सुगमता से कर सकते हैं , प्रत्येक परिस्थिति में कर सकते हैं |

 

परिस्थिति को मिटना या बदलना अपने हाथ की बात नहीं है , उसका सदुपयोग करना हमारे हाथ की बात है |

 

अनुकूल – प्रतिकूल दोनों ही परिस्थिति के सदुपयोग से अपना कल्याण कर सकते हैं |

 

परिस्थिति बदलने की जरूरत नहीं है | कल्याण के लिए नयी परिस्थिति जरूरत नहीं है |

 

वस्तुओं को भगवान के अर्पण करने का अर्थ है – मेरापन छोड़ देना अर्थात उसे अपना न मानना |

 

अर्पण करने से आपकी एक टोला भर वस्तु घटेगी नहीं , पर निहाल हो जाओगे !

 

सक्ताः कर्मण्यविद्वांसो यथा कुर्वन्ति भारत।

कुर्याद्विद्वांस्तथासक्तश्िचकीर्षुर्लोकसंग्रहम्।।

हे भारत ! कर्म में आसक्त हुए अज्ञानीजन जैसे कर्म करते हैं वैसे ही विद्वान् पुरुष अनासक्त होकर, लोकसंग्रह (लोक कल्याण) की इच्छा से कर्म करे।।

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