January 20, 2022

केदारताल – ये है उत्तराखंड की सबसे खूबसूरत झील, ये है यहाँ की कहानी

केदारताल - ये है उत्तराखंड की सबसे खूबसूरत झील, ये है यहाँ की कहानी

केदार ताल को उत्तराखंड की सबसे खूबसूरत और रहस्यमयी झील के रूप में जाना जाता है। यह झील उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में समुद्रतल से 4750 मीटर की ऊंचाई पर स्तिथ है। इस झील के विषय में कहा जाता है कि यह शिव को समर्पित है। इसलिए इसे शिव की झील के नाम से भी पुकारा जाता है। चारों तरफ से हिमाच्छादित पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्तिथ इस झील की शोभा देखते ही बनती है। इसलिए केदार ताल को गढ़वाल की सबसे खूबसूरत झीलों में से एक कहा जाता है।

गंगोत्री से 18 किमी की दूरी पर स्तिथ यह ताल जितनी खूबसूरत है उतना ही दुर्गम इसका रास्ता है। मगर फिर भी हर साल रोमांच प्रेमी इस झील के दर्शनों के लिए ट्रेक पर निकल पड़ते हैं। केदारताल थाल सागर जो 6904 मीटर की ऊंचाई पर स्तिथ है, भृगुपंथ (6772) और आसपास की अन्य चोटियों के कारण इसकी सतह हमेशा सदानीरा रहती है। वहीँ इन हिमाच्छादित पर्वत श्रृंखलाओं और रात्रि में साफ़ नीले आसमान की सितारों की छत का प्रतिबिंब जब ताल की सतह पर बनता है तो इसकी खूबसूरती देखते ही बनती है।

ये है केदारताल की कहानी

प्रकृति की गोद में स्तिथ केदार ताल के बारे में मान्यता है कि इसके जल को स्वयं भगवान शिव ने पिया था। पौराणिक कथा के अनुसार जब देवताओं और अशुरों ने समुद्र मंथन किया था तो उससे निकलने वाले 14 रत्नों में हलाहल विष भी शामिल था। जिसे भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया था। शिव के हलाहल विष पिने के बाद विष के प्रकोप से उनका कंठ जलने लगा था। उसी तीक्ष्ण जलन को शांत करने के लिए भगवान शिव ने गंगोत्री से 18 किमी दूर स्तिथ इस ताल के जल को पिया तभी से यह झील केदार ताल के नाम से विख्यात हुई और इस झील की धारा से केदार गंगा का निर्माण हुआ। जो गंगोत्री से निकलने वाली गंगा की सहायक नदी भी है।

ऐसे पहुंचे केदारताल

केदार ताल आने के लिए यात्रिओं को सबसे पहले दिल्ली से हवाई या सड़क मार्ग से देहरादून या रेलमार्ग से ऋषिकेश पहुंचना होगा। फिर यहाँ से आपको कैब लेकर गंगोत्री पहुंचना होगा। गंगोत्री से ही केदार ताल की पैदल यात्रा का पड़ाव शुरू होता है।

गंगोत्री से लगभग 18 किमी दूर स्तिथ केदार ताल की खूबसूरती को देखने हर साल हाइकर्स और ट्रेकर्स का जत्था आता है। और एक बार जो आता है वो इस झील के सुन्दर नजारे की खूबसूरती को देखकर यहीं का हो जाता है। यही कारण है हर साल इसकी यात्रा पर आने वाले ट्रैकर्स की संख्या में इजाफा हो रहा है। इसके अलवा इस झील की यात्रा के दौरान दुर्लभ नीली भेड़ें (भरल), हिमालयी काले भालू और विभन्न सुंदर दुर्लभ पक्षियाँ देखने को मिलती हैं। इस झील की यात्रा तीन पड़ावों में पूरी की जाती है। पहला पड़ाव गंगोत्री से 8 किमी दूर भोरहक फिर लगभग 4 किमी दूर केदारचाक और उसके बाद केदारताल में डेरा डाला जाता है।

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